आजकल टीवी इन्टरनेट अखबार मे किसी भी समस्या के लिये समाधान बताने के लिये लाखो लोग पैदा हो गये है। हर समस्या का समाधान तंत्र के द्वारा पलक झपकते ही ठीक होने का दावा भी किया जाता है और समस्या के प्रति कारणो को भी खूब तरीके से बताया जाता है। ग्रहो की समस्याओं के लिये भी कई प्रकार के निवारण बताये जाते है और लोग करते भी खूब है किसी को हल्की सी चिन्ता होने पर भी लोग उसके निवारण के लिये अपने को इसी प्रकार के लोगो को खोजा करते है। किसी को सरकारी नौकरी की चिन्ता है किसी को अपनी प्रेमिका से मिलने की दिक्कत है कोई अपनी मर्जी से शादी करना चाहता है लेकिन उसके घर वाले उसकी बात को नही मान रहे है,कोई अपनी नौकरी मे तो है लेकिन उसे अपनी नौकरी से सन्तुष्टि नही है,किसी को घर बनाने की चिन्ता है किसी को पैसा वाला बनना है आदि बाते बडे रूप मे देखने को मिल जाती है। दैनिक अखबारो मे तो हद ही हो गयी है कितने ही पीर फ़कीर बाबा अपनी अपनी हस्ती को बखान करने से नही चूक रहे है,किसी को गोल्ड मेडलिस्ट होने का गर्व है किसी को कोई किसी हस्ती से सम्मानित है किसी को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है कोई माता काली का भक्त है कोई हनुमान जी का भक्त है कोई किसी बडे पीर या जिन्नात की सेवा करने वाला है कोई कहता है कि उसने देवी की बहुत बडी भक्ति की है इसलिये उसके पास वरदान है आदि बाते देखने को भी मिलती है और अपने मियां मिट्ठू बनने वाली बाते भी मिलती है। हजारो लाखों प्रकार की कमन्युटी भी लोगो ने सोसियल साइट्स पर बना रखी है और उन पर लिखने वाले ऐसे ऐसे तंत्र वाले कारण लिखे मिलते है कि कोई भी उन तंत्रो को कर लेने और अंजवालेने से नही चूकना चाहता है। टीवी पर भी रात के बारह बजते ही कितने लोग पत्ते लेकर बैठ जाते है कोई राशिफ़ल बताना शुरु कर देता है कोई राशि रत्न का प्रभाव बताना शुरु कर देता है कोई तांत्रिक चीजो को बेचना शुरु कर देता है यानी हर समस्या का समाधान मिलना बहुत ही सस्ता हो गया है।
जमाने की हवा के अनुसार अक्सर यह भी देखा गया है कि लोगो के सामने कितनी ही जरूरते पैदा हो गयी है पहले आदमी के पास जितनी संकुचित मात्रा मे उपभोग की वस्तुये होती थी उतनी ही वह अपने को एक ही विचार धारा मे लेकर चलता था लेकिन जैसे जैसे साधन बढते गये उतनी ही आवश्यकता की जरूरत पडती गयी और अब जो समय आ गया है वह केवल बुद्धिमान लोगो केलिये तो ठीक माना जा सकता है लेकिन जो किसी कारण से अपने को शिक्षा मे नही ले जा पाये,या जिन्हे पहले साधन मिले थे उन्होने आज की चाल चलन वाली स्थिति से उन्हे बरबाद कर दिया है या जो धन वाले थे लेकिन उन्होने अपने धन को सट्टा शेयर आदि मे बरबाद कर दिया है वही लोग तंत्र आदि के चक्कर मे जाते हुये अधिक देखे जा सकते है। पुरुषों से अधिक महिलाये तंत्र के चक्कर मे अधिक पडती है,जिनकी शादी नही हुयी है वे अधिक चक्कर मे पडती देखी जा सकती है शादी के बाद भी जो लोग पति या पति परिवार से पीडित है वे भी परेशान देखी जा सकती है। अक्सर सन्तान के मामले मे भी कई बार लोग तंत्र के चक्कर मे पडते देखे जा सकते है।अक्सर तंत्र का कारण मुख्य रूप से धन और शरीर के प्रति प्रयोग मे लाया जाता है लोग धन को खर्च करने के बाद शरीर की सुरक्षा को चाहते है और कुछ लोग शरीर को खर्च करने के बाद धन की सुरक्षा को चाहते है।
बिना किसी जानकारी के तंत्र को प्रयोग करना मंत्र का जाप करना और यंत्र की साधना करना बेकार भी हो जाता है,यह उसी प्रकार से जैसे एक मोटर साइकिल चलाने वाला कार को चलाने लगे,हो सकता है कि वह कुछ दूर आराम से चला कर ले जाये लेकिन यह जरूरी नही है कि वह कार के बारे मे पूरी तरह से जानता ही हो,और जब जानकारी नही होगी तो हो सकता है वह बजाय मंजिल के पहुंचाने के असपताल मे भी पहुंचा सकता है और ऊपर का रास्ता भी दिखा सकता है।इसी प्रकार से तंत्र की बाते होती है आजकल लोग लालकिताब की तांत्रिक बातो को खूब प्रयोग मे लाने की कोशिश करते है लेकिन लाल किताब की तीसरी मुख्य थ्यौरी होती है कि अपने को सदाचार मे लेकर चलना अगर कोई व्यक्ति यह कहता है कि मै मंगलवार का व्रत करता हूँ और वह बुधवार या रविवार को शराब पीता है या मांस का भोजन करता है या किसी गलत संगति मे जाकर अपने को भ्रष्ट करता है तो वह मंगल को तो सुधार लेगा लेकिन उस मंगल के सुधार मे जो तत्व उसके खून मे प्रवेश करेंगे वे तत्व उसके नेक मंगल को बद बनाने मे कोई कसर बाकी नही रखेंगे और यह भी होगा कि वह अगर चाहेगा कि उसे कोई सहायता मिल जाये ओत वह भी असम्भव होगा कारण उसने नेक मंगल को भी खराब कर लिया और बद को भी खराब कर लिया वह अच्छे और बुरे के बीच मे पिसकर अपने जीवन को निकालता रहेगा जैसे ही कोई गलत ग्रह की शक्ति उसके ऊपर हावी होगी वह उसी ग्रह के चक्कर मे अपना सब कुछ गंवा देगा और इस जीवन से चला जायेगा।इसका उदाहरण है कि काकानी ट्रेडर दिल्ली वले मेरे पास आये थे उनका विदेशो मे लेबर सप्लाई का काम था अच्छा कमीशन कम्पनिया उन्हे देती थी,हल्की पूरी समस्या आने पर वे किसी लालकिताबी के पास चले गये और उसने कह दिया कि बारह बोतल शराब बहते पानी मे बहा दो,उन्होने बहा दी और जो उनका व्यपार चल रहा था वह भी बन्द हो गया मैने भी उनसे कह दिया कि बारह महिने तक कुछ नही हो सकता है। इस प्रकार से जहां शनि के उपाय राहु के प्रयोग मे लाये जाते है वे शनि के लिये तब और खतरनाक हो जाते है जब राहु किसी गलत शक्ति से उस शनि के प्रति अपनी शक्ति का प्रयोग करने लगता है। तांत्रिक क्रियायें करने वाले लोगो के लिये एक प्रकार से दलाली करने वाला कारण भी देखा है कि वे किसी जानकार ज्योतिषी से सम्बन्ध रखते है और जिसके लिये तंत्र आदि करना है उसके लिये किसी कार्यक्रम को ज्योतिषी के अनुसार रख देते है जैसे किसी को बडी बीमारी है और उस बीमारी को दूर करने के लिये तांत्रिक कारण करने वाली क्रिया को बताते है वह बात उस ज्योतिषी से पता कर लेते है कि अमुक व्यक्ति की अमुक बीमारी कब खत्म हो रही है उसी तारीख के अनुसार वे उस व्यक्ति के लिये तांत्रिक क्रिया को करने के लिये सामने आतेहै या अपने खर्चे आदि को बता देते है किसी भी साधारण से किये गये दिखावे वाले प्रयास को करने के बाद उस व्यक्ति को बीमारी से निजात भी मिल जाती है और उस साधारण सी क्रिया को करने वाले व्यक्ति के लिये एक बडी नाम करने वाली उपलब्धि भी मिल जाती है। इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि कई व्यक्ति अपने को उसी स्वांग मे बना लेंगे जो स्वांग काफ़ी खतरनाक देखने मे लगता हो जैसे काले कपडे पहिनना रुद्राक्ष या इसी प्रकार की माला पहिनना फ़िर लम्बा सा टीका माथे पर लगा लेना,किसी प्रकार के समझ मे नही आने वाले नशे को कर लेना। और उनके द्वारा अनाप सनाप बाते करना साथ मे मृत पुरुषो की ह्ड्डी और खोपडी आदि रख लेना,इससे देखने वाला भय से पहले ही अपनी रूप रेखा को बदलने लगता है साथ ही उसे किसी न किसी प्रकार सम्मोहन शक्ति से भी वशीभूत करने वाली बातो को तांत्रिक करते है जो अपने को बडे देवताओं के नाम से प्रयोग मे लाते है वे जरूरी है कि धार्मिक भावनाओ से खेलने वाले होते है।इस प्रकार से तंत्र पर विश्वास करने से पहले अपने खुद के तंत्र को समझना बहुत जरूरी होता है जो तुमने किया है उसका फ़ल तुम्हारे द्वारा ही काटा जायेगा,कोई और तुम्हारे बोये फ़ल को नही काट पायेगा।
जमाने की हवा के अनुसार अक्सर यह भी देखा गया है कि लोगो के सामने कितनी ही जरूरते पैदा हो गयी है पहले आदमी के पास जितनी संकुचित मात्रा मे उपभोग की वस्तुये होती थी उतनी ही वह अपने को एक ही विचार धारा मे लेकर चलता था लेकिन जैसे जैसे साधन बढते गये उतनी ही आवश्यकता की जरूरत पडती गयी और अब जो समय आ गया है वह केवल बुद्धिमान लोगो केलिये तो ठीक माना जा सकता है लेकिन जो किसी कारण से अपने को शिक्षा मे नही ले जा पाये,या जिन्हे पहले साधन मिले थे उन्होने आज की चाल चलन वाली स्थिति से उन्हे बरबाद कर दिया है या जो धन वाले थे लेकिन उन्होने अपने धन को सट्टा शेयर आदि मे बरबाद कर दिया है वही लोग तंत्र आदि के चक्कर मे जाते हुये अधिक देखे जा सकते है। पुरुषों से अधिक महिलाये तंत्र के चक्कर मे अधिक पडती है,जिनकी शादी नही हुयी है वे अधिक चक्कर मे पडती देखी जा सकती है शादी के बाद भी जो लोग पति या पति परिवार से पीडित है वे भी परेशान देखी जा सकती है। अक्सर सन्तान के मामले मे भी कई बार लोग तंत्र के चक्कर मे पडते देखे जा सकते है।अक्सर तंत्र का कारण मुख्य रूप से धन और शरीर के प्रति प्रयोग मे लाया जाता है लोग धन को खर्च करने के बाद शरीर की सुरक्षा को चाहते है और कुछ लोग शरीर को खर्च करने के बाद धन की सुरक्षा को चाहते है।
बिना किसी जानकारी के तंत्र को प्रयोग करना मंत्र का जाप करना और यंत्र की साधना करना बेकार भी हो जाता है,यह उसी प्रकार से जैसे एक मोटर साइकिल चलाने वाला कार को चलाने लगे,हो सकता है कि वह कुछ दूर आराम से चला कर ले जाये लेकिन यह जरूरी नही है कि वह कार के बारे मे पूरी तरह से जानता ही हो,और जब जानकारी नही होगी तो हो सकता है वह बजाय मंजिल के पहुंचाने के असपताल मे भी पहुंचा सकता है और ऊपर का रास्ता भी दिखा सकता है।इसी प्रकार से तंत्र की बाते होती है आजकल लोग लालकिताब की तांत्रिक बातो को खूब प्रयोग मे लाने की कोशिश करते है लेकिन लाल किताब की तीसरी मुख्य थ्यौरी होती है कि अपने को सदाचार मे लेकर चलना अगर कोई व्यक्ति यह कहता है कि मै मंगलवार का व्रत करता हूँ और वह बुधवार या रविवार को शराब पीता है या मांस का भोजन करता है या किसी गलत संगति मे जाकर अपने को भ्रष्ट करता है तो वह मंगल को तो सुधार लेगा लेकिन उस मंगल के सुधार मे जो तत्व उसके खून मे प्रवेश करेंगे वे तत्व उसके नेक मंगल को बद बनाने मे कोई कसर बाकी नही रखेंगे और यह भी होगा कि वह अगर चाहेगा कि उसे कोई सहायता मिल जाये ओत वह भी असम्भव होगा कारण उसने नेक मंगल को भी खराब कर लिया और बद को भी खराब कर लिया वह अच्छे और बुरे के बीच मे पिसकर अपने जीवन को निकालता रहेगा जैसे ही कोई गलत ग्रह की शक्ति उसके ऊपर हावी होगी वह उसी ग्रह के चक्कर मे अपना सब कुछ गंवा देगा और इस जीवन से चला जायेगा।इसका उदाहरण है कि काकानी ट्रेडर दिल्ली वले मेरे पास आये थे उनका विदेशो मे लेबर सप्लाई का काम था अच्छा कमीशन कम्पनिया उन्हे देती थी,हल्की पूरी समस्या आने पर वे किसी लालकिताबी के पास चले गये और उसने कह दिया कि बारह बोतल शराब बहते पानी मे बहा दो,उन्होने बहा दी और जो उनका व्यपार चल रहा था वह भी बन्द हो गया मैने भी उनसे कह दिया कि बारह महिने तक कुछ नही हो सकता है। इस प्रकार से जहां शनि के उपाय राहु के प्रयोग मे लाये जाते है वे शनि के लिये तब और खतरनाक हो जाते है जब राहु किसी गलत शक्ति से उस शनि के प्रति अपनी शक्ति का प्रयोग करने लगता है। तांत्रिक क्रियायें करने वाले लोगो के लिये एक प्रकार से दलाली करने वाला कारण भी देखा है कि वे किसी जानकार ज्योतिषी से सम्बन्ध रखते है और जिसके लिये तंत्र आदि करना है उसके लिये किसी कार्यक्रम को ज्योतिषी के अनुसार रख देते है जैसे किसी को बडी बीमारी है और उस बीमारी को दूर करने के लिये तांत्रिक कारण करने वाली क्रिया को बताते है वह बात उस ज्योतिषी से पता कर लेते है कि अमुक व्यक्ति की अमुक बीमारी कब खत्म हो रही है उसी तारीख के अनुसार वे उस व्यक्ति के लिये तांत्रिक क्रिया को करने के लिये सामने आतेहै या अपने खर्चे आदि को बता देते है किसी भी साधारण से किये गये दिखावे वाले प्रयास को करने के बाद उस व्यक्ति को बीमारी से निजात भी मिल जाती है और उस साधारण सी क्रिया को करने वाले व्यक्ति के लिये एक बडी नाम करने वाली उपलब्धि भी मिल जाती है। इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि कई व्यक्ति अपने को उसी स्वांग मे बना लेंगे जो स्वांग काफ़ी खतरनाक देखने मे लगता हो जैसे काले कपडे पहिनना रुद्राक्ष या इसी प्रकार की माला पहिनना फ़िर लम्बा सा टीका माथे पर लगा लेना,किसी प्रकार के समझ मे नही आने वाले नशे को कर लेना। और उनके द्वारा अनाप सनाप बाते करना साथ मे मृत पुरुषो की ह्ड्डी और खोपडी आदि रख लेना,इससे देखने वाला भय से पहले ही अपनी रूप रेखा को बदलने लगता है साथ ही उसे किसी न किसी प्रकार सम्मोहन शक्ति से भी वशीभूत करने वाली बातो को तांत्रिक करते है जो अपने को बडे देवताओं के नाम से प्रयोग मे लाते है वे जरूरी है कि धार्मिक भावनाओ से खेलने वाले होते है।इस प्रकार से तंत्र पर विश्वास करने से पहले अपने खुद के तंत्र को समझना बहुत जरूरी होता है जो तुमने किया है उसका फ़ल तुम्हारे द्वारा ही काटा जायेगा,कोई और तुम्हारे बोये फ़ल को नही काट पायेगा।

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