जातक के जन्म के बाद जातक की जीवन की गति को सितारों की सहायता से पता किया जाता है कि किस भाग मे किस प्रकार की उन्नति जातक के जीवन में होगी या वह अपने को दूसरो के सहारे से चलाता रहेगा।
प्रस्तुत कुंडली एक वृश्चिक लगन के जातक की है,इस जातक की उम्र वर्तमान में २८ साल ४ महिना है लेकिन जातक को जीवन के प्रति किसी भी क्षेत्र मे नौकरी आदि मे सफ़लता नही मिली है। धन के क्षेत्र मे केतु विराजमान है,यानी धन का प्रयोग केवल साधनो मे ही खर्च कर दिया गया है,हिम्मत के क्षेत्र मे कोई भी ग्रह नही है केवल इस क्षेत्र को नवे भाव मे विराजमान शुक्र ही देख रहा है जो पत्नी भाव के साथ साथ व्यय और यात्रा के भावों का मालिक है। विद्या के क्षेत्र का मालिक भी शनि है जो व्यय और यात्रा के साथ साथ विदेश भाव मे विराजमान है। बुद्धि के क्षेत्र का मालिक होने के साथ साथ धन के क्षेत्र का मालिक भी गुरु है जो लगन मे ही वक्री होकर विराजमान है। और अपनी उल्टी गति से बारहवे भाव के विराजमान वक्री शनि को ही देख रहा है। जातक की बुद्धि के मामले मे अगर देखा जाये तथा भौतिक रूप से धन के लिये माना जाये तो जातक की सोच विदेश मे जाकर धन कमाने के लिये मानी जाती है। नौकरी का मालिक और लगन का मालिक मंगल है जो राहु और सूर्य के साथ अष्टम भाव मे विराजमान है,इस प्रकार से राहु के साथ होने से जातक को जो विद्या मिली है और गुप्त बुद्धि है वह तकनीकी कार्यों के लिये मानी जाती है,जातक ने तकनीकी क्षेत्र मे रहकर बहुत शिक्षा प्राप्त की है और उसकी सोच एक बडे वैज्ञानिक के रूप मे अपने कार्यों को सफ़ल करने की है,लेकिन बुध जो इस भाव के साथ साथ लाभ भाव का भी मालिक है जीवन साथी के खाते मे चला गया है। जब तक जातक की शादी नही होती है तब तक इसका कार्य क्षेत्र के प्रति विकास होना और प्राप्त की जाने वाली विद्याओं का प्रयोग होना नही माना जा सकता है। भाग्य का मालिक चन्द्रमा है जो लगन मे ही गुरु के साथ विराजमान है,जातक को वक्री गुरु के साथ वाला चन्द्रमा केवल उन्ही क्षेत्रो मे ले जा सकता है जो बीमा से सम्बन्धित हो धन को मृत्यु के बाद प्राप्त करवा सकते हों। अथवा मृत्यु के समय या कठिन बीमारियों के समय अथवा मशीनरी संस्थानो मे व्यापारिक संस्थानो मे बैंक आदि में जो धन किसी प्रकार से डूब जाते है उनके लिये कार्य करने की अपनी युति को प्रदान कर रहा है। भाग्य स्थान में भी सप्तम का स्वामी शुक्र विराजमान हो गया है,सप्तम का स्वामी भी व्यय और विदेश भाव का स्वामी है जो यही सूचित कर रहा है कि व्यक्ति को तभी जीवन के क्षेत्र मे सफ़लता मिलेगी जब शुक्र घर मे स्थापित हो जायेगा। यह स्थान शुक्र के होने के कारण जातक के अन्दर वायुयान सम्बन्धी शिक्षा या वायुयान से यात्रा सम्बन्धी कारणो को भी पैदा करता है,कारण केतु से अष्टम स्थान मे शुक्र के होने से जातक के अन्दर वायुयान सम्बन्धी तकनीक या पिता अथवा पिता के रिस्तेदारो से सम्बन्धित धन से बडे व्यवसायिक स्थान बनाने के लिये अपनी मानसिकता को भी माना जाता है और विदेश से व्यापार करने की मानसिकता को भी माना जा सकता है। वर्तमान मे राहु का गोचर लगन मे ही होने के कारण और गुरु के साथ गोचर करने के कारण पिता का दिमाग पुत्र के प्रति अधिक चिन्तित माना जा सकता है। कारण पिता का स्थान अस्पताली राशि मे होने के कारण और पिता रूपी सूर्य का स्थान मंगल के साथ होने से पिता को या तो अस्पताली कारणो से जूझना पडता है या पिता को असपताली क्षेत्रो से तकनीकी रूप से फ़ायदा होना माना जाता है। जातक के लिये बिना राहु के उपाय करवाये बुध किसी भी प्रकार से जातक के कार्यों को फ़लीभूत नही होने देगा इसके लिये राहु का तर्पण बहुत ही आवश्यक है। जातक का मंगली रूप भी बहुत अधिक खतरनाक माना जा सकता है,कारण मंगल के साथ राहु के होने से जातक का मानसिक उद्वेग बहुत अधिक है,और मंगल के आगे शुक्र होने से अगर राहु का उपाय नही करवाया जा सकता है तो जातक को शादी के बाद पत्नी के द्वारा न्याय प्रक्रिया से भी जूझना पड सकता है या अधिक कामुकता की वजह से पत्नी के प्रति अस्पताली कारणो से भी जूझना पड सकता है।
प्रस्तुत कुंडली एक वृश्चिक लगन के जातक की है,इस जातक की उम्र वर्तमान में २८ साल ४ महिना है लेकिन जातक को जीवन के प्रति किसी भी क्षेत्र मे नौकरी आदि मे सफ़लता नही मिली है। धन के क्षेत्र मे केतु विराजमान है,यानी धन का प्रयोग केवल साधनो मे ही खर्च कर दिया गया है,हिम्मत के क्षेत्र मे कोई भी ग्रह नही है केवल इस क्षेत्र को नवे भाव मे विराजमान शुक्र ही देख रहा है जो पत्नी भाव के साथ साथ व्यय और यात्रा के भावों का मालिक है। विद्या के क्षेत्र का मालिक भी शनि है जो व्यय और यात्रा के साथ साथ विदेश भाव मे विराजमान है। बुद्धि के क्षेत्र का मालिक होने के साथ साथ धन के क्षेत्र का मालिक भी गुरु है जो लगन मे ही वक्री होकर विराजमान है। और अपनी उल्टी गति से बारहवे भाव के विराजमान वक्री शनि को ही देख रहा है। जातक की बुद्धि के मामले मे अगर देखा जाये तथा भौतिक रूप से धन के लिये माना जाये तो जातक की सोच विदेश मे जाकर धन कमाने के लिये मानी जाती है। नौकरी का मालिक और लगन का मालिक मंगल है जो राहु और सूर्य के साथ अष्टम भाव मे विराजमान है,इस प्रकार से राहु के साथ होने से जातक को जो विद्या मिली है और गुप्त बुद्धि है वह तकनीकी कार्यों के लिये मानी जाती है,जातक ने तकनीकी क्षेत्र मे रहकर बहुत शिक्षा प्राप्त की है और उसकी सोच एक बडे वैज्ञानिक के रूप मे अपने कार्यों को सफ़ल करने की है,लेकिन बुध जो इस भाव के साथ साथ लाभ भाव का भी मालिक है जीवन साथी के खाते मे चला गया है। जब तक जातक की शादी नही होती है तब तक इसका कार्य क्षेत्र के प्रति विकास होना और प्राप्त की जाने वाली विद्याओं का प्रयोग होना नही माना जा सकता है। भाग्य का मालिक चन्द्रमा है जो लगन मे ही गुरु के साथ विराजमान है,जातक को वक्री गुरु के साथ वाला चन्द्रमा केवल उन्ही क्षेत्रो मे ले जा सकता है जो बीमा से सम्बन्धित हो धन को मृत्यु के बाद प्राप्त करवा सकते हों। अथवा मृत्यु के समय या कठिन बीमारियों के समय अथवा मशीनरी संस्थानो मे व्यापारिक संस्थानो मे बैंक आदि में जो धन किसी प्रकार से डूब जाते है उनके लिये कार्य करने की अपनी युति को प्रदान कर रहा है। भाग्य स्थान में भी सप्तम का स्वामी शुक्र विराजमान हो गया है,सप्तम का स्वामी भी व्यय और विदेश भाव का स्वामी है जो यही सूचित कर रहा है कि व्यक्ति को तभी जीवन के क्षेत्र मे सफ़लता मिलेगी जब शुक्र घर मे स्थापित हो जायेगा। यह स्थान शुक्र के होने के कारण जातक के अन्दर वायुयान सम्बन्धी शिक्षा या वायुयान से यात्रा सम्बन्धी कारणो को भी पैदा करता है,कारण केतु से अष्टम स्थान मे शुक्र के होने से जातक के अन्दर वायुयान सम्बन्धी तकनीक या पिता अथवा पिता के रिस्तेदारो से सम्बन्धित धन से बडे व्यवसायिक स्थान बनाने के लिये अपनी मानसिकता को भी माना जाता है और विदेश से व्यापार करने की मानसिकता को भी माना जा सकता है। वर्तमान मे राहु का गोचर लगन मे ही होने के कारण और गुरु के साथ गोचर करने के कारण पिता का दिमाग पुत्र के प्रति अधिक चिन्तित माना जा सकता है। कारण पिता का स्थान अस्पताली राशि मे होने के कारण और पिता रूपी सूर्य का स्थान मंगल के साथ होने से पिता को या तो अस्पताली कारणो से जूझना पडता है या पिता को असपताली क्षेत्रो से तकनीकी रूप से फ़ायदा होना माना जाता है। जातक के लिये बिना राहु के उपाय करवाये बुध किसी भी प्रकार से जातक के कार्यों को फ़लीभूत नही होने देगा इसके लिये राहु का तर्पण बहुत ही आवश्यक है। जातक का मंगली रूप भी बहुत अधिक खतरनाक माना जा सकता है,कारण मंगल के साथ राहु के होने से जातक का मानसिक उद्वेग बहुत अधिक है,और मंगल के आगे शुक्र होने से अगर राहु का उपाय नही करवाया जा सकता है तो जातक को शादी के बाद पत्नी के द्वारा न्याय प्रक्रिया से भी जूझना पड सकता है या अधिक कामुकता की वजह से पत्नी के प्रति अस्पताली कारणो से भी जूझना पड सकता है।
1 comment:
सादर प्रणाम गुरुजी🙏,
एक जातक की कुंडली का विवेचन करने की कृपा करें। जातक का जन्म 20 अक्टूबर 1987 को बिहार राज्य के बक्सर जिले के डुमराँव नगर में मंगलवार को रात्रि 22 बजकर 17 मिनट 30 सेकंड पर हुआ।
आपके विवेचना के इंतज़ार में 🙏🙏
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