Monday, January 16, 2012

क्यों वापस हो रहे है रिस्ते ?

जीवन मे तीन कारण ज्योतिष से समझने के लिये काफ़ी माने जाते है,जन्म परण और मरण.जन्म के लिये माता पिता जिम्मेदार होते है परण के लिये समाज परिवार और संसार जिम्मेदार होता है मरण के लिये खुद के कर्म और प्रकृति जिम्मेदार होती है। पिछले मई के महिने से जो प्रश्न आ रहे है उनके अन्दर विवाह भी तय हो जाता है या विवाह के लिये हां भी कर दी जाती है और या तो बारात आकर ही वापस चली जाती है या विवाह के लिये आने वाली बारात ही नही आती है देखने के लिये आने वाले भी नही आते है,आते भी है तो अपनी भ्रम वाली स्थिति से विवाह के लिये सही हां या ना नही होती है.अधिकतर मामले फ़ेस कट से सम्बन्धित होते है कभी दूल्हे का फ़ेस नही सही लगता है कभी दुलहन का फ़ेस सही नही लगता है कभी दोनो के परिवार वाले एक दूसरे को नीची नजर से देखते है कभी दोनो के बीच का लेन देन भी अपनी भ्रम वाली स्थिति को देने के लिये माना जाता है. सामाजिक बदलाव के लिये कालपुरुष की कुंडली को देखना जरूरी होता है.समाज मे चलने वाली स्थिति और समाज की सोच को ग्रह के अनुसार ही देखा जाता है शनि मंगल राहु केतु समाज की सोच के अन्दर या तो अन्धेरा दे देते है और कुछ सोचा जाता है कुछ होने लगता है,अक्समात ही उत्तेजना भी देखी जाती है,कनफ़्यूजन की बजह से कोई गलत काम हो जाता है या नकारात्मकता के चलते जो भी अच्छा होना होता है उसे भी सही नही देखा जाता है।
शादी विवाह के लिये वर पक्ष और वधू पक्ष के मानसिक विचारो को समझना जरूरी होता है.यह विचार वर और वधू के मानसिक विचारो की श्रेणी की बढती हुयी शाखाओं के रूप मे और ग्रह भाव राशि के बदलने वाली क्रिया से पैदा होने वाले कारको से समझा जा सकता है.जैसे वर के दिमाग मे पैदा हुआ कि वधू देखने मे कुछ अच्छी नही लग रही है,उसका दूसरा भाव जो उसके कुटुम्ब के लोग है,उनका उसी श्रेणी मे विचार बनने लगता है,जन्म से सुख सुविधा नही मिल पायीं होंगी इसलिये सुन्दरता मे कमी आ गयी उसी स्थान पर छोटे भाई बहिनो की बाते भी आने लगी कि नाक नक्स और पहिनावा भी ठीक नही है,फ़िर माता की भावना आने लगी कि घर के कार्यों को यह कैसे कर पायेगी,फ़िर शिक्षा के बारे मे भी कहा गया कि जो शिक्षा वर की है उससे बराबरी की नही है। उसके बाद देन लेन और कायदे कानून की आयी बाद मे उस रिस्ते को नकार दिया गया। इसी बीच मे अगर वर के अष्टम से लगन तक खराब ग्रह विद्यमान है और दूसरे भाव से सप्तम तक अच्छे ग्रह विद्यमान है तो वर पक्ष बिना कुछ नुक्ताचीनी किये ही रिस्ते को स्वीकार कर लेगा। यही विचार वधू की कुंडली से भी देखा जाता है। लेकिन कालपुरुष की कुंडली मे भी यह बात जरूरी है,अन्यथा वर और वधू की कुंडली मिलाने के बाद भी रिस्ता बनकर टूट जाना और टूटा हुआ भी जुड जाना माना जा सकता है।
वर्तमान मे कालपुरुष की कुंडली मे शनि का स्थान तुला राशि पर है राहु का स्थान वृश्चिक राशि पर है,केतु वृष मे विराजमान है मंगल सिंह का है। शनि तुला का उच्च का है मंगल भी मित्र ग्रही है राहु शमशानी राशि मे है और केतु धन और कुटुम्ब की राशि मे है।
इस ग्रह युति मे अगर चलाकर किसी से सम्बन्ध की बात की जाती है तो सामने वाला अपनी शनि की युति से रिस्ते के मामले में ठंडक और अन्धेरा देता है। या तो सामने वाला बात ही नही करता है या बात करने के समय किसी कठोर व्यवहार को प्रयोग करता है,अथवा वह अपने स्थान पर ही नही मिलता है,या बता दिया जाता है कि वह किसी कार्य व्यवसाय या नौकरी आदि से बाहर गया है या किसी कार्य मे व्यस्त है। पिछले समय मे होने वाले सामाजिक बदलाव का असर भी अब देखने मे आ रहा है कि लोग अपने अपने परिवारों से दूरिया बनाकर रहने लगे है किसी भी बात के लिये अगर किये जाने वाले रिस्ते के प्रति पिछली ऐतिहासिक बातों पर गौर किया जाता है तो पता चलता है कि उसके परिवार समाज और रीति रिवाज अचल सम्पत्ति के मामले मे ही कोई न कोई ऐसी बात है जहां से केवल भ्रम को ही पाया जाता है इस बात को पैदा करने वाला राहु है। रिस्ते को करने के लिये भी वर्तमान मे दोहरे साधनो से कार्य किया जा रहा है। लोग अधिकतर मामले मे कमन्यूकेशन का अधिक प्रयोग कर रहे है जैसे पेपर मीडिया इन्टरनेट आदि,इन कारणो से रिस्ता चुना भी जाता है मनोहारी विज्ञापन को देखने के बाद रिस्ते के प्रति ललक भी बढती है लेकिन जैसे ही हकीकत से सामना होता है पता चलता है कि उस रिस्ते के अन्दर कई प्रकार की भ्रम वाली स्थितियां भी है जिन्हे समझना और रिस्ते को करना मुनासिब ही नही है,इस बात का कारक केतु को माना जाता है। राहु के वृश्चिक राशि मे जाने जो लोग मीडिया कम्पयूटर और सामाजिक साइटों से रिस्ते खोजा करते थे उनके अन्दर अधिकतर फ़रेब और गुप्त जानकारी करने का कारण भी माना जा सकता है। जैसे माता पिता किसी रिस्ते को व्यक्तिगत रूप से तय करने के लिये तैयार होते है उसी समय लडकी अपनी योग्यता से इन साइट मे जाकर पता कर लेती है कि लडके की अन्य लडकियों से भी दोस्ती है या उसके चाल चलन पर कोई न कोई बात खोज ली जाती है। इस राहु का समय आने वाले जनवरी दो हजार तेरह तक है,इस समय मे अधिकतर रिस्तों के अन्दर बद्लाव और आमने सामने के लिये कनफ़्यूजन और दोहरी बातों से रिस्ते बिगडने की बात जरूरी है। यही नही बदलाव का कारण एक और भी है जो शनि की बदौलत है जैसे काम धन्धे सम्बन्धी कनफ़्यूजन परिवार अचल सम्पत्ति सम्बन्धी कनफ़्यूजन धन तथा खानपान सम्बन्धी कनफ़्यूजन सुन्दरता सम्बन्धी और पहिनावे सम्बन्धी कनफ़्यूजन माना जा सकता है।

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